
तहलका टुडे इंटरनेशनल डेस्क /सैयद रिजवान मुस्तफा
आयतुल्लाह अली सिस्तानी, इराक के प्रमुख धार्मिक नेता और शिया इस्लाम के सबसे प्रभावशाली धार्मिक विद्वानों में से एक, को हाल के समय में अपमानित करने के प्रयासों का सामना करना पड़ा है। इस अपमान के पीछे की वजहें न केवल राजनीतिक हैं, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक भी हैं। इस लेख में हम इस विषय की गहराई में जाएंगे और यह समझेंगे कि इजराइल और आतंकवाद का गहरा संबंध कैसे इस अपमान के पीछे छिपा है।
आयतुल्लाह सिस्तानी का महत्व
आयतुल्लाह अली सिस्तानी का इराक समेत पूरी दुनिया में अपार प्रभाव है। वे न केवल धार्मिक मामलों में मार्गदर्शन करते हैं, बल्कि राजनीतिक मुद्दों पर भी उनकी राय महत्वपूर्ण मानी जाती है। उनका उद्देश्य सद्भाव और शांति को बढ़ावा देना है, और उन्होंने हमेशा उग्रवाद और आतंकवाद के खिलाफ आवाज उठाई है। उनकी धार्मिक शिक्षाएँ लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं और उन्होंने इराक में शांति और स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
इजराइल का आतंकवाद में हाथ
इजराइल ने हमेशा से ही अपने राजनीतिक लक्ष्यों के लिए आतंकवादी समूहों का समर्थन किया है। दाइश (ISIS) का उदय भी इसी रणनीति का हिस्सा था। दाइश ने इराक और सीरिया में अपने आतंकवादी नेटवर्क को फैलाने के लिए अपने स्वार्थी लक्ष्यों का उपयोग किया। इजराइल ने अपने राजनीतिक हितों के लिए इस्लामिक स्टेट को भड़काने का प्रयास किया, जिससे क्षेत्र में अस्थिरता बनी रहे और वे अपने लक्ष्यों को आसानी से हासिल कर सकें।
दाइश का उदय और उसका खात्मा
दाइश ने 2014 में इराक में अपने कदम रखे और तेजी से पूरे देश में आतंक फैलाया। उन्होंने न केवल शिया मुसलमानों को निशाना बनाया, बल्कि अन्य धार्मिक और सांस्कृतिक समूहों को भी अत्याचार का शिकार बनाया। आयतुल्लाह सिस्तानी ने दाइश के खिलाफ ‘जिहाद’ का आह्वान किया, जिसने इराकी समाज में एकजुटता को बढ़ावा दिया। इसके परिणामस्वरूप, विभिन्न धर्मों के लोग एक साथ आए और दाइश के खिलाफ लड़े।
इराकी सुरक्षा बलों और सहयोगियों के समर्थन से, दाइश को धीरे-धीरे खात्मा किया गया। 2017 में, इराक ने आधिकारिक तौर पर दाइश के खिलाफ विजय की घोषणा की। यह विजय केवल एक सैन्य संघर्ष नहीं थी, बल्कि एक सांस्कृतिक और धार्मिक संघर्ष भी थी। आयतुल्लाह सिस्तानी की धार्मिक शिक्षाएं और उनकी अपील ने इराक के लोगों को एकजुट किया और उन्हें आतंकवाद के खिलाफ खड़े होने के लिए प्रेरित किया।
अपमान की पृष्ठभूमि
हाल के दिनों में, आयतुल्लाह सिस्तानी के प्रति अपमान के प्रयास, इजराइल की रणनीतियों का एक हिस्सा हैं। यह अपमान न केवल उनके व्यक्तिगत व्यक्तित्व पर हमला है, बल्कि यह इराक के शिया समुदाय को कमजोर करने की एक साजिश भी है। इजराइल चाहता है कि आयतुल्लाह की लोकप्रियता और प्रभाव को कम किया जाए, जिससे वे इराक में अपने राजनीतिक और धार्मिक लक्ष्य को हासिल कर सकें।
सांस्कृतिक और धार्मिक प्रतिक्रियाएं
आयतुल्लाह सिस्तानी के प्रति अपमान के प्रयासों ने इराक में एक व्यापक प्रतिक्रिया पैदा की है। धार्मिक नेताओं और समुदायों ने इस अपमान की कड़ी निंदा की है और इसके खिलाफ आवाज उठाई है। इसने इराकी समाज को और अधिक एकजुट किया है और लोगों ने आयतुल्लाह के प्रति अपनी निष्ठा को और मजबूत किया है।
आयतुल्लाह अली सिस्तानी के प्रति अपमान के पीछे की साजिशें न केवल इजराइल की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हैं, बल्कि यह आतंकवाद को बढ़ावा देने की एक कोशिश भी हैं। दाइश का खात्मा और आयतुल्लाह का प्रभाव यह दर्शाता है कि इराकी समाज में एकता और स्थिरता का महत्व कितना अधिक है। हमें यह समझना चाहिए कि जब भी किसी धार्मिक नेता या समुदाय को निशाना बनाया जाता है, तो यह केवल उनके खिलाफ नहीं होता, बल्कि यह समाज की स्थिरता और शांति को भी चुनौती देता है।
इसलिए, सभी को मिलकर ऐसी साजिशों का विरोध करना चाहिए और एक मजबूत, शांतिपूर्ण और सहिष्णु समाज की दिशा में काम करना चाहिए। आयतुल्लाह सिस्तानी जैसे नेताओं की शिक्षाएं हमें प्रेरणा देती हैं कि हमें हमेशा आतंकवाद और असामाजिक तत्वों के खिलाफ खड़ा होना चाहिए, चाहे वो किसी भी रूप में हों।

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