
इंक़लाब उर्दू में छपी वरिष्ठ पत्रकार तारिक खान की रिपोर्ट
बाराबंकी। स्व. बेनी प्रसाद वर्मा के अचानक निधन पर यूं तो बाराबंकी का हर व्यक्ति बेहद ग़मज़दा है, लेकिन सियासी गलियारों में साथ कंधों से कंधा मिलाकर चलने वाले सियासतदानों के दिल के अहसासात की नुमाइंदगी उनके शोक संदेश से होती है। जो उन्होंने इंक़लाब से वार्ता करते हुए व्यक्त किए,जो पाठकों में समक्ष उसके कुछ सश प्रस्तुत है।
एक ज़माने में बेनी प्रसाद वर्मा के घोर विरोधी कहे जाने वाले प्रदेश के पूर्व मंत्री हाजी फरीद महफूज किदवई ने बेनी वर्मा के लिए अपना शोक संदेश व्यक्त करते हुए कहा कि जिले के लिए यह एक बड़ा हादसा है, बहुत बड़ा नुकसान है,इतना बड़ा नुकसान जिले का पहले कभी नही हुआ,जिसका शोक घर घर मे मनाया जा रहा है। वह बाराबंकी वासियों के दिलों में वर्षों बसे रहेंगे,उनका जो योगदान जिले के लिए है उसको बाराबंकी वासी कभी भुला न सकेंगे। उनकी सियासत बुनियादी तौर पर खालिस समाजवादी फिक्र की सियासत थी।उन्होंने किसानों की समस्याओं विशेषकर गन्ना किसानों की समस्याओं को लेकर आवाज़ जिले में बुलंद की और वह केन यूनिय की लीडरशिप से उठ कर सियासत के सबसे ऊंचे सदन तक न सिर्फ केवल पहुंचे बल्कि देश के अहमतरीन वज़ारती कलमदानों को भी संभाला । उनके कामो व ईमानदारी पर कभी कोई सवाल न खड़ा किया जा सका।वर्मा जी ने जो भी हासिल किया वो अपनी निजी योगिताओ व मेहनत से बनाया किसी का सहारा नही लिया।
वर्मा जी ने बहुत से सियासतदानों का कैरियर बनाया
हाजी फ़रीद महफूज़ किदवाई से यह पूछे जाने पर की बेनी वर्मा क्या सिर्फ कुर्मियों के नेता थे और क्या वह फ़िरक़ा परस्त थे?इसके जवाब में पूर्व मंत्री ने कहा कि यह बात सच है कि उन्होंने कुर्मियों को समाजिक आर्थिक और राजनीतिक तौर पर ऊपर उठाने में मदद की,मगर मुसलमानों को भी बहुत कुछ दिया, जितनी नौकरियां अपनी वजारत के समय में उन्होंने दिलाई उतनी न उनसे पहले किसी नेता ने मुसलमानों को दिलाई थी और न अब कोई शायद ही दिला सके। कांग्रेस पार्टी के पूर्व जिला अध्यक्ष और पूर्व कैबिनेट मंत्री बेगम मोहसिना किदवई के भतीजे फवाद किदवाई ने बेनी वर्मा को अपना शोक संदेश व्यक्त करते हुए कहा कि जब वह कांग्रेस में थे तो उनसे सियासत की कई बारीकियां उन्होंने सीखी,मगर अफसोस ज़्यादा दिन तक उनका साथ उन्हें न मिल सका।वह बड़े दिल के आदमी थे,उनके परिवार से उनका सियासी मुकाबला रहता था मगर रिश्तों में हमेशा निकटता रही।
पूर्व कैबिनेट मंत्री छोटे लाल यादव ने बेनी वर्मा को जिले की सियासत का नायाब हीरा बताते हुए कहा कि ऐसा नेता बरसों में पैदा होता है, उनके जाने से जिले की सियासत में जो कमी आई है उसका पूरा होना बहुत मुश्किल है।वह न सिर्फ बाराबंकी व उत्तर प्रदेश में कुर्मियों के सबसे बड़े नेता थे। बल्कि सपा के भी बड़े नेता थे उन्होंने जितनी इज़्ज़त अपनी क़ौम को दी,अपनी बिरादरी को जितना समाज मे सम्मान दिलाया वह काम उनके समाजवादी साथी नेता मुलायम सिंह यादव अपनी बिरादरी के लिए न कर सके।